महासागर : अंतः समुद्री उच्चावच तथा महासागरीय जल का परिसंचरण
भूमिका
पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका है। महासागर न केवल पृथ्वी के जलमंडल का सबसे बड़ा भाग हैं, बल्कि वे जलवायु नियंत्रण, जैव विविधता, व्यापार, मत्स्य पालन और मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। महासागर की तली पर विविध प्रकार के स्थलरूप पाए जाते हैं जिन्हें अंतः समुद्री उच्चावच कहा जाता है। इसके साथ‑साथ महासागरीय जल निरंतर गतिशील रहता है, जिसे महासागरीय जल का परिसंचरण कहते हैं।
1. महासागर बेसिन (Ocean Basin)
महासागर बेसिन महासागर की तली का वह विस्तृत भाग है जो महाद्वीपीय तट से लेकर गहरे समुद्री भागों तक फैला होता है। इसमें विभिन्न प्रकार के स्थलरूप पाए जाते हैं।
महासागर बेसिन के प्रमुख भाग:
महाद्वीपीय शेल्फ
महाद्वीपीय ढाल
गहरे समुद्री मैदान
महासागरीय गर्त
मध्य‑महासागरीय कटक
2. महाद्वीपीय शेल्फ (Continental Shelf)
महाद्वीपीय शेल्फ महाद्वीपों के किनारे स्थित उथला समुद्री भाग होता है। इसकी ढाल बहुत कम होती है।
विशेषताएँ
गहराई सामान्यतः 0 से 200 मीटर तक
विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्र यहीं पाए जाते हैं
खनिज तेल, प्राकृतिक गैस आदि के भंडार
जैविक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध
3. महाद्वीपीय ढाल (Continental Slope)
महाद्वीपीय शेल्फ के बाद समुद्र तल का तीव्र ढाल वाला भाग महाद्वीपीय ढाल कहलाता है।
विशेषताएँ
ढाल अधिक तीव्र
गहराई तेजी से बढ़ती है
कई स्थानों पर पनडुब्बी घाटियाँ (Submarine Canyons)
4. गहरे समुद्री मैदान (Deep Sea Plains)
महाद्वीपीय ढाल के बाद फैले विस्तृत समतल क्षेत्र गहरे समुद्री मैदान कहलाते हैं।
विशेषताएँ
अत्यंत समतल और विस्तृत
महीन अवसादों की मोटी परत
पृथ्वी के सबसे बड़े समतल क्षेत्र
5. महासागरीय गर्त (Oceanic Trenches)
महासागर तल के सबसे गहरे और संकीर्ण भाग महासागरीय गर्त कहलाते हैं।
विशेषताएँ
अत्यधिक गहराई (8,000 से 11,000 मीटर)
प्लेट विवर्तनिकी से संबंधित
उदाहरण: मेरियाना गर्त (विश्व का सबसे गहरा गर्त)
6. मध्य‑महासागरीय कटक (Mid‑Oceanic Ridges)
महासागर तल पर फैली लंबी पर्वत श्रृंखलाएँ मध्य‑महासागरीय कटक कहलाती हैं।
विशेषताएँ
ज्वालामुखीय उत्पत्ति
नई महासागरीय पपड़ी का निर्माण
अटलांटिक महासागर में स्पष्ट
7. महासागरीय जल का परिसंचरण
महासागरीय जल निरंतर विभिन्न गतियों में प्रवाहित होता रहता है। इन गतियों को महासागरीय जल का परिसंचरण कहते हैं।
महासागरीय जल की प्रमुख गतियाँ:
तरंगें
ज्वार‑भाटा
महासागरीय धाराएँ
8. तरंगें (Waves)
तरंगें मुख्यतः पवन द्वारा उत्पन्न होती हैं। इनमें जल अपने स्थान पर रहकर ऊपर‑नीचे गति करता है।
महत्व
तटीय अपरदन व निक्षेपण
तटों के स्थलरूपों का निर्माण
9. ज्वार‑भाटा (Tides)
चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से समुद्र जल का ऊपर उठना ज्वार और नीचे होना भाटा कहलाता है।
प्रकार
उच्च ज्वार
निम्न ज्वार
वसंत ज्वार
नीप ज्वार
महत्व
नौपरिवहन में सहायक
विद्युत उत्पादन
तटीय सफाई
10. महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents)
महासागर में एक निश्चित दिशा में बहने वाले जल प्रवाह को महासागरीय धाराएँ कहते हैं।
धाराओं के प्रकार
गर्म धाराएँ
ठंडी धाराएँ
प्रभाव
जलवायु पर प्रभाव
वर्षा वितरण
तटीय तापमान में परिवर्तन
महासागरों का महत्व
जलवायु नियंत्रण
खाद्य संसाधन
खनिज संसाधन
व्यापार व परिवहन
जैव विविधता का संरक्षण
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)
प्रश्न 1. अंतः समुद्री उच्चावच क्या है?
उत्तर: महासागर की तली पर पाए जाने वाले विभिन्न स्थलरूपों जैसे शेल्फ, ढाल, मैदान, गर्त आदि को अंतः समुद्री उच्चावच कहते हैं।
प्रश्न 2. पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग जल से ढका हुआ है, इसलिए इसे नीला ग्रह कहा जाता है।
प्रश्न 3. महाद्वीपीय शेल्फ की औसत गहराई कितनी होती है?
उत्तर: महाद्वीपीय शेल्फ की औसत गहराई लगभग 200 मीटर तक होती है।
प्रश्न 4. विश्व का सबसे गहरा महासागरीय गर्त कौन‑सा है?
उत्तर: मेरियाना गर्त विश्व का सबसे गहरा महासागरीय गर्त है।
प्रश्न 5. महासागरीय जल की गतियाँ कितनी प्रकार की होती हैं?
उत्तर: महासागरीय जल की तीन प्रमुख गतियाँ होती हैं – तरंगें, ज्वार‑भाटा और महासागरीय धाराएँ।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. महाद्वीपीय शेल्फ का आर्थिक महत्व लिखिए।
उत्तर: महाद्वीपीय शेल्फ आर्थिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ मछलियों की अधिकता होती है, इसलिए यह प्रमुख मत्स्य क्षेत्र है। इसके अतिरिक्त यहाँ पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और खनिज संसाधन भी पाए जाते हैं।
प्रश्न 2. महाद्वीपीय ढाल क्या है?
उत्तर: महाद्वीपीय शेल्फ के बाद समुद्र तल का जो भाग तीव्र ढाल वाला होता है, उसे महाद्वीपीय ढाल कहते हैं। इसमें समुद्र की गहराई तेजी से बढ़ती है।
प्रश्न 3. गहरे समुद्री मैदान से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: महाद्वीपीय ढाल के बाद फैले अत्यंत समतल और विस्तृत समुद्री भागों को गहरे समुद्री मैदान कहते हैं। ये महीन अवसादों से ढके होते हैं।
प्रश्न 4. महासागरीय गर्तों की उत्पत्ति कैसे होती है?
उत्तर: महासागरीय गर्त प्लेट विवर्तनिकी की क्रिया के कारण बनते हैं, जब एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धँस जाती है।
प्रश्न 5. तरंगें क्या हैं?
उत्तर: पवन के प्रभाव से समुद्र की सतह पर उत्पन्न ऊपर‑नीचे होने वाली गति को तरंगें कहते हैं। इसमें जल अपने स्थान पर रहता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. महासागर तल के प्रमुख स्थलरूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: महासागर तल पर विभिन्न प्रकार के स्थलरूप पाए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं –
(1) महाद्वीपीय शेल्फ: यह उथला और समतल भाग होता है।
(2) महाद्वीपीय ढाल: शेल्फ के बाद तीव्र ढाल वाला भाग।
(3) गहरे समुद्री मैदान: अत्यंत समतल और विस्तृत क्षेत्र।
(4) महासागरीय गर्त: महासागर के सबसे गहरे भाग।
(5) मध्य‑महासागरीय कटक: महासागर तल पर फैली पर्वत श्रृंखलाएँ।
प्रश्न 2. ज्वार‑भाटा क्या है? इसके प्रकार और महत्व बताइए।
उत्तर: चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से समुद्र जल का ऊपर उठना ज्वार तथा नीचे होना भाटा कहलाता है।
इसके प्रमुख प्रकार हैं – उच्च ज्वार, निम्न ज्वार, वसंत ज्वार और नीप ज्वार।
ज्वार‑भाटा नौपरिवहन, विद्युत उत्पादन और तटीय क्षेत्रों की सफाई में सहायक होता है।
प्रश्न 3. महासागरीय धाराएँ क्या हैं? इनके प्रभाव बताइए।
उत्तर: महासागर में एक निश्चित दिशा में बहने वाले जल प्रवाह को महासागरीय धाराएँ कहते हैं। ये दो प्रकार की होती हैं – गर्म और ठंडी धाराएँ।
महासागरीय धाराएँ तटीय जलवायु, वर्षा वितरण, तापमान और मानव जीवन को प्रभावित करती हैं।
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