प्रमुख स्थलरूप और उनका आर्थिक महत्व
भूमिका (Introduction)
पृथ्वी की सतह पर दिखाई देने वाली विविध प्राकृतिक आकृतियों को स्थलरूप कहा जाता है। इनका निर्माण पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों (जैसे—ज्वालामुखी, भूकंप, प्लेट विवर्तनिकी) तथा बाह्य शक्तियों (जैसे—अपक्षय, अपरदन, निक्षेपण, नदियाँ, पवन, हिमनद) के निरंतर प्रभाव से होता है।
आंतरिक शक्तियाँ धरातल को ऊपर उठाने या मोड़ने का कार्य करती हैं, जबकि बाह्य शक्तियाँ ऊँचे भागों को काट-छाँट कर समतल बनाती हैं। इन दोनों शक्तियों के संतुलन से पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के स्थलरूप विकसित होते रहते हैं।
धरातल पर पाए जाने वाले तीन प्रमुख स्थलरूप हैं—
पर्वत
पठार
मैदान
इन स्थलरूपों का मानव जीवन, आर्थिक गतिविधियों, बसावट, कृषि, उद्योग और परिवहन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
7.1 पर्वत (Mountains)
परिभाषा
पर्वत पृथ्वी की सतह के वे अत्यधिक ऊँचे, उबड़-खाबड़ और ढालदार भाग होते हैं, जो अपने आसपास के क्षेत्रों से बहुत अधिक ऊँचाई पर स्थित होते हैं। सामान्यतः पर्वतों की ऊँचाई 600 मीटर से अधिक मानी जाती है।
प्रमुख विशेषताएँ
ऊँचाई अधिक होती है
ढाल तीव्र होती है
जलवायु ठंडी होती है
जनसंख्या घनत्व कम होता है
पर्वतों के प्रकार
(1) मोड़दार पर्वत (Fold Mountains)
ये पर्वत पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से चट्टानों के मुड़ने के कारण बनते हैं। ये पर्वत भू-वैज्ञानिक दृष्टि से युवा होते हैं।
उदाहरण: हिमालय, आल्प्स, एंडीज, रॉकी
विशेषता: विश्व के सबसे ऊँचे पर्वत इसी श्रेणी में आते हैं
(2) भ्रंश पर्वत (Block Mountains)
भ्रंश क्रिया के दौरान जब धरातल का एक भाग ऊपर उठ जाता है और दूसरा नीचे धँस जाता है, तब भ्रंश पर्वत बनते हैं।
उदाहरण: सतपुड़ा (भारत), वॉस्ज पर्वत (फ्रांस)
(3) ज्वालामुखी पर्वत (Volcanic Mountains)
ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान निकले लावा के जमने से बने पर्वत।
उदाहरण: माउंट फुजी (जापान), माउंट किलिमंजारो (अफ्रीका)
पर्वतों का आर्थिक महत्व
नदियों का उद्गम स्थल (गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र)
जलविद्युत परियोजनाएँ
वनों से लकड़ी व औषधीय पौधे
पर्यटन उद्योग (हिल स्टेशन)
प्राकृतिक सुरक्षा दीवार
जलवायु नियंत्रण एवं वर्षा में सहायक
7.2 पठार (Plateaus)
परिभाषा
पठार पृथ्वी की सतह का वह भाग होता है जो अपने आसपास के क्षेत्रों से ऊँचा होता है, लेकिन इसकी ऊपरी सतह अपेक्षाकृत समतल होती है। इसे "उच्च मैदान" भी कहा जाता है।
प्रमुख विशेषताएँ
ऊँचाई मध्यम
सतह समतल
खनिजों से समृद्ध
जनसंख्या मध्यम
पठारों के प्रकार
(1) अंतरमहाद्वीपीय पठार
महाद्वीपों के बीच स्थित बहुत ऊँचे पठार।
उदाहरण: तिब्बत का पठार
(2) महाद्वीपीय पठार
महाद्वीपों के भीतर स्थित पठार।
उदाहरण: दक्कन का पठार, अफ्रीकी पठार
(3) ज्वालामुखी पठार
लावा के फैलने और जमने से बने पठार।
उदाहरण: दक्कन ट्रैप
पठारों का आर्थिक महत्व
खनिज संसाधनों की प्रचुरता (कोयला, लोहा)
औद्योगिक विकास के लिए उपयुक्त
कृषि (काली मिट्टी क्षेत्र)
जलप्रपात और जलविद्युत
7.3 मैदान (Plains)
परिभाषा
मैदान पृथ्वी की सतह के निम्न, समतल और विस्तृत भाग होते हैं। ये मुख्यतः नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेप से बनते हैं।
प्रमुख विशेषताएँ
अत्यधिक उपजाऊ भूमि
घनी जनसंख्या
परिवहन में सुविधा
मैदानों के प्रकार
(1) जलोढ़ मैदान
नदियों द्वारा लाए गए अवसादों से बने मैदान।
उदाहरण: गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान
(2) तटीय मैदान
समुद्र तट के पास स्थित समतल क्षेत्र।
उदाहरण: भारत के पूर्वी व पश्चिमी तटीय मैदान
(3) डेल्टा मैदान
नदियों के मुहाने पर बने त्रिभुजाकार मैदान।
उदाहरण: सुंदरबन डेल्टा
मैदानों का आर्थिक महत्व
सर्वाधिक कृषि उत्पादन
औद्योगिक व नगरीय विकास
परिवहन और व्यापार में सुविधा
अधिक जनसंख्या निवास
lस्थलरूप और मानव जीवन
बसावट का स्वरूप
आर्थिक गतिविधियाँ
प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग
Lपरीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण
परिभाषाएँ स्पष्ट लिखें
उदाहरण अवश्य दें
आर्थिक महत्व बिंदुओं में लिखें
सारांश
पर्वत, पठार और मैदान पृथ्वी के प्रमुख स्थलरूप हैं। ये मानव जीवन, प्राकृतिक संतुलन और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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