Friday, January 02, 2026

हिमानी, पवन और समुद्री तरंगों के कार्य

हिमानी, पवन और समुद्री तरंगों के कार्य 

भूमिका

पृथ्वी की सतह निरंतर बदलती रहती है। इस परिवर्तन के लिए बाह्य बल (Exogenic Forces) उत्तरदायी होते हैं। इनमें हिमानी (Glaciers), पवन (Wind) और समुद्री तरंगें (Sea Waves) प्रमुख कारक हैं। ये कारक अपक्षय (Weathering), अपरदन (Erosion), परिवहन (Transportation) और निक्षेपण (Deposition) के माध्यम से स्थलाकृतियों का निर्माण करते हैं।

6.1 हिमक्षेत्र (Glacial Region)

वे क्षेत्र जहाँ वर्ष भर तापमान हिमांक से नीचे रहता है और हिम पिघलने के बजाय जमा रहता है, उन्हें हिमक्षेत्र कहते हैं। ऐसे क्षेत्र प्रायः ध्रुवीय भागों एवं ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

हिमपात (Snowfall)

जब तापमान बहुत कम होता है तो वर्षा जल के रूप में न होकर हिम के रूप में होती है, इसे हिमपात कहते हैं।

हिमरेखा (Snow Line)

हिमरेखा वह काल्पनिक रेखा है जिसके ऊपर हिम वर्ष भर जमी रहती है और नीचे गर्मियों में पिघल जाती है। हिमरेखा की ऊँचाई अक्षांश, तापमान, ढाल और पवनों पर निर्भर करती है।

6.2 हिमानी (Glacier)

हिमपात से जमी बर्फ जब अपने भार के कारण धीरे-धीरे ढाल की ओर खिसकने लगती है तो उसे हिमानी कहते हैं। हिमानी को "बहती हुई बर्फ की नदी" भी कहा जाता है।

हिमानी के प्रकार

1. पर्वतीय या घाटी हिमानी (Valley Glacier)

  • ये पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं।

  • संकरी घाटियों में बहती हैं।

  • उदाहरण: हिमालय की गंगोत्री हिमानी।

2. महाद्वीपीय हिमानी (Continental Glacier)

  • विशाल क्षेत्र को ढक लेती हैं।

  • ध्रुवीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं।

  • उदाहरण: ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका।

3. पिडमोंट हिमानी (Piedmont Glacier)

  • जब घाटी हिमानी मैदान में पहुँचकर फैल जाती है।

6.3 हिमानी का कार्य

(A) अपरदन कार्य

हिमानी अपने साथ चट्टानों को घसीटते हुए चलती है, जिससे स्थल का अपरदन होता है।

मुख्य अपरदन स्थलाकृतियाँ:

  • सर्क (Cirque) : कटोरे के आकार की संरचना

  • यू-आकार की घाटी (U-shaped Valley)

  • हैंगिंग वैली (Hanging Valley)

  • एरेट (Arete)

  • हॉर्न (Horn)

(B) परिवहन कार्य

हिमानी अपने साथ चट्टानों, कंकड़ों और मिट्टी को दूर तक ले जाती है।

(C) निक्षेपण कार्य

जब हिमानी पिघलती है तो साथ लाई सामग्री जमा हो जाती है।

निक्षेपण स्थलाकृतियाँ:

  • मोरीन (Moraine) – पार्श्व, मध्य, अग्र और आधार मोरीन

  • ड्रमलिन (Drumlin)

  • एस्कर (Esker)

  • आउटवॉश मैदान (Outwash Plain)

6.4 पवन का कार्य (Work of Wind)

शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पवन एक प्रमुख अपरदन कारक है।

पवन द्वारा अपरदन

  • अपस्फोटन (Deflation)

  • घर्षण (Abrasion)

पवन द्वारा निर्मित स्थलाकृतियाँ

अपरदन स्थलाकृतियाँ:

  • मशरूम शैल (Mushroom Rock)

  • यार्डांग (Yardang)

निक्षेपण स्थलाकृतियाँ:

  • बालू के टीले (Sand Dunes)

    • बार्खान

    • सीफ

    • अनुदैर्ध्य टीले

  • लोएस (Loess)

6.5 समुद्री तरंगों का कार्य (Work of Sea Waves)

समुद्र की तरंगें तटीय क्षेत्रों को निरंतर प्रभावित करती हैं।

समुद्री अपरदन के कारक

  • हाइड्रोलिक क्रिया

  • घर्षण

  • संक्षारण

समुद्री अपरदन स्थलाकृतियाँ

  • समुद्री गुफा (Sea Cave)

  • समुद्री मेहराब (Sea Arch)

  • समुद्री स्तंभ (Sea Stack)

  • क्लिफ (Cliff)

समुद्री निक्षेपण स्थलाकृतियाँ

  • समुद्री तट (Beach)

  • स्पिट (Spit)

  • बार (Bar)

  • टॉम्बोलो (Tombolo)

निष्कर्ष

हिमानी, पवन और समुद्री तरंगें पृथ्वी की सतह को आकार देने वाले महत्वपूर्ण बाह्य बल हैं। इनके द्वारा निर्मित स्थलाकृतियाँ न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि मानव जीवन, परिवहन और पर्यटन पर भी गहरा प्रभाव डालती हैं।


No comments: